गुरुवार, 8 मई 2008

काले तालाब के विकास के लिये आवश्यकता है एक ठोस प्रयास की....

आष्टा 27 अप्रैल (सुशील संचेती)। मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 37 किलो मीटर दूर बसे सिद्धपुर (सीहोर) नगर के लिए जिस प्रकार पार्वती नदी नगर के नागरिकों के लिए जीवनदायनी मानी जाती है ठीक उसी प्रकार आष्टा नगर के वार्ड क्रं. 16 में नगर वर्षो पुराना तालाब जिसे काले तालाब के नाम से जाना जाता है । जो कन्नौद रोड से लगा हुआ है । और लगभग 32 एकड़ क्षैत्र में फैला है उक्त काला तालाब आष्टा नगर के लिए काफी महत्वपूर्ण तो है ही लेकिन इस तालाब के आस-पास बसी कालोनी, सांई कालोनी, बजरंग नगर, चन्दन नगर, भोपाल नाका क्षैत्र,पुष्प विद्यालय रोड, काछीपुरा शास्त्री कालोनी, मुकाती कालोनी, सेमनरी रोड, अब्दुल्लापुरा सहित दूर दूर तक फैले क्षैत्र के कुंओ और टयूबेलों के लिए जल स्त्रोंतो इसी काले तालाब से जिंदा रहते है । इस तालाब के आस-पास बसी 3-4 कालोनीयों में रहने वालो के मकानों में लगे टयूबेलों तो इसी काले तालाब के कारण जीवित तब तक रहते है । जब तक इसमें पानी रहता है।
जब से म.प्र. सरकार ने जल अभिषेक अभियान गर्मी में प्रत्येक वर्ष जनभागीदारी से शुरू किया आष्टा के पार्षद रवि सोनी के विशेष प्रयासों से इस काले तालाब का भी जल अभिषेक के तहत जन भागीदारी से नगर पालिका अध्यक्ष कैलाश परमार ने विशेष रूचि लेकर हर वर्ष इसको गहरीकरण करवाया उसी का परिणाम है कि आज इस तालाब का काफी क्षैत्र काफी गहरा हो गया है । लेकिन इस तालाब का क्षैत्रफल काफी लम्बा है और 2-4 साल में इसका गहरीकरण संभव नही है कम से कम 10-15 साल प्रत्येक गर्मी में महिनों गहरीकरण का कार्य इसमें चलेगा तभी यह तालाब गहरा होगा । गर्मी का सीजन प्रारम्भ हो गया है तालाब भी लगभग पानी से खाली हो गया है केवल पाल से लगा क्षैत्र में ही थोड़ा पानी नजर आ रहा है और अब पुन: इस तालाब के गहरीकरण की शुरूआत आविलम्ब शुरू की जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है जब तक पाल के पास पानी है तब तक तालाब के पीछले हिस्से से जो पुरा सुख चुका है गहरीकरण की शुरूआत की जा सकती है। न.पा. अध्यक्ष कैलाश परमार, वार्ड के जागरूक पार्षद रवि सोनी को इसके लिए सोचना चाहिये ।
किसानों के लिए है वरदान:-
32 एकड़ क्षैत्र में फैला उक्त काला तालाब एक और जहां आस-पास रहने वाले नागरिकों के लिए तो पानी का महत्वपूर्ण जल स्त्रोत है वही उक्त तालाब आस-पास के किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस तालाब में बरसात का जो पानी स्टोर होता है उसके कारण दूर-दूर तक के खेतो में बने कुएं और टयूबेलो भी इसके कारण जीवित रहते है । इस कारण से निश्चित उक्त तालाब एक तरह से किसानों के लिए वरदान माना जाता है ।
पानी चौरी भी किया जाता है:-
इस तालाब में बरसात का इतना पानी स्टोर हो जाता है कि जो अगर इस तालाब से खेतो के मालिक गेहूं-चने की फसलो को पानी की चौरी कर सिंचाई करते है । अगर उक्त सिंचाई रूक जाये तो निश्चित इस तालाब का पानी पुरी गर्मी भरा रहे और आस-पास कालोनीयों में गर्मी में जल संकट की दस्तक सुनाई नही है । लेकिन कभी भी इस तालाब से पानी की चौरी को रोकने के लिए कोई ठोस प्रयास नही किये गये । यही कारण रहता है कि पूरे साल इसमें पानी तो भरा रहता है लेकिन गेंहू-चने की बुवाई के बाद 1-2 माह में उक्त तालाब पूरा खाली हो जाता है ।
गंदा पानी तालाब में जा रहा है:-
आज की स्थिति में फुरसत ने इस तालाब को जब जाकर देखा तो पुरा तालाब लगभग खाली हो चुका है केवल मेन रोड से लगी जो तालाब की पाल है उस पाल से लगे कुछ क्षैत्र में थोड़ा पानी भरा नजर आ रहा है। वो पानी भी नगर का जो गंदा पानी बहकर तालाब के प्रवेश द्वार से होता हुआ तालाब में पहुंच रहा है । वही इस तालाब को आस-पास के लोगों ने सुबह एक खुला शौचालय के रूप में इस्तेमान कर तालाब को गंदा किया जाता है तालाब में इन दिनों जो प्रवेश द्वार से नगर का व आस-पास का जो गंदा पानी प्रवेश कर रहा है उसे रोका जाना चाहिये । तथा जो गंदगी कुड़ा-कचरा तालाब में भेजा जाता है इस पर भी सख्ती से रोक लगाना चाहिये ।
कब विकसित होगा यह तालाब :-
जब आष्टा के विधायक स्वर्गीय नन्दकिशोर खत्री थे और म.प्र. मे सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में प्रदेश की भाजपा की सरकार थी तब से ही लेकर आज तक इस तालाब के विकास, सौन्दर्यीकरण, पिकनीक स्पांट के रूप में विकसित करने तालाब की पाल पर वृक्षारोपण करने एवं इस तालाब को सुंदर और आकर्षित बनाने की बात हो रही है । योजना भी बनाई गई शासन को भी भेजी गई लेकिन इस दौरान लगभग 18 साल बीत गये लेकिन आज तक इस तालाब के विकास, सौन्दर्यीकरण, वृक्षारोपण, के लिए कुछ नही हुआ क्या इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि चाहे वो स्वर्गीय नन्दकिशोर खत्री रहे हो, रंजीत सिंह गुणवान रहे हो, या वर्तमान विधायक जो है उनका जिम्मेदार माना जाये या आष्टा नगर पालिका को खैर इसके लिए कोई भी जिम्मेदार हो लेकिन अब तो न.पा. आष्ट, क्षैत्र के पार्षद एवं वर्तमान विधायक को इस और ध्यान देना चाहिये क्योंकि उक्त तालाब का विकास आष्टा के लिए जरूरी हो गया है । अगर ऐसा होता है तो नगर के नागरिकों, के लिए घुमने-फिरने के लिए एक अच्छा स्थान उपलब्ध हो जायेगा ।
अतिक्रमण से मुक्त होना चाहिये :-
आष्टा का उक्त तालाब जो 32 एकड़ क्षैत्र में फैला है जल अभिषेक अभियान के प्रथम वर्ष इस तालाब के आस-पास जो अतिक्रमण था उसे हटाया गया था उसके पहले भी अतिक्रमण हटाने की मांग पर एक बार उक्त पूरे तालाब को नापकर सीमांकन किया था लेकिन फिर भी अतिक्रमण हो गया । इस और भी ध्यान दिया जाना चाहिये कि तालाब अतिक्रमण से मुक्त हो और उसके सीमांकन किया जाये। एवं चारो और की तालाब की पाल को भी चौडा किया जाना चाहिये ।
शुरूआत तो हुई है:-
विकास का इंतजार कर रहे नगर के काले तालाब पर विकास का श्री गणेश हुआ है पानी के प्रवेश द्वार के पास काले तालाब पर नहाने आने वालो की सुविधा के लिए एक बड़े सर्व सुविधा युक्त घाट निर्माण का गत दिवस भूमि पूजन हुआ है । उक्त घाट को निर्माण में अनाज-तिलहन व्यापारी संघ की और से 50 हजार, सांसद कैलाश जोशी ने सांसद निधि से 1 लाख, न.पा. आष्टा ने एक लाख एवं जिला योजना समिति से 50 हजार कुल 3 लाख से घाट का निर्माण हो रहा है । इसे एक अच्छे सकारात्मक सोच के साथ विकास के रूप में नई शुरूआत माना जा रहा है ।
विकास के लिए केन्द्र को भेजी है एक योजना:-
आष्टा नगर पालिका के अध्यक्ष कैलाश परमार ने काले तालाब के विकास, गहरीकरण एवं सौन्दर्यीकरण के लिए एक योजना नगरपालिका से बनाकर केन्द्रिय बन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार को लगभग 25 से 30 लाख की भेजी है। उसकी स्वीकृ ति का भी न.पा. को इंतजार है। इसके पहले इस तालाब के विकास की एक योजना म.प्र.शासन को भी भेजी गई थी उसका भी अभी तक कुछ हुआ नही है । अब तो आवश्यता है कि सभी को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस तालाब के विकास के लिए अपने-अपने स्तर पर ठोस प्रयास करने की अगर ऐसा हुआ तो आष्टा को एक अच्छी सौगात मिल सकती है बशर्ते प्रयास ईमानदारी से हो.....
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