बुधवार, 23 अप्रैल 2008

कहां गई राधाकृष्ण के ब्रज की प्राकृतिक सुंदरता

मन मोहन , नवभारत टाइम्स

वृंदावन: कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर भक्त प्रसन्न जरूर हैं, परन्तु ब्रज की सुंदरता में आती गिरावट उन्हें तकलीफ देती है। कल्पना कीजिए, सूखा पनघट, सूखे कुंड, मैली यमुना, वीरान जंगल और उजड़े उपवन। आखिर वृंदावन और मथुरा अपनी प्राकृतिक सुंदरता से रहित हो जाएं तो क्या इसे राधाकृष्ण का ब्रज कहा जाएगा?
भगवान कृष्ण की जन्मभूमि कहलाने वाला ब्रज क्षेत्र लगभग 5 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला है। यूपी का पूरा मथुरा जिला और इसके वृन्दावन व बरसाने इलाके, राजस्थान के भरतपुर जिले की डीग और कामा तहसील और हरियाणा के फरीदाबाद जिले की होडल तहसील इसमें आती है।
राजस्थान में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद अवैध मेसनरी स्टोन की माइनिंग जारी है जिससे यहां का वातावरण बिगड़ रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी कहा कि ताज ट्रेपजियम जोन से संबंधित गाइडलाइंस की भी अवहेलना हो रही है। राधा रानी का गांव बरसाने जहां राधा हर पल कृष्णमय रहती थीं, जहां उनका प्रेम पल्लवित-पुष्पित हुआ, जहां उन्होंने बाल लीलाएं कीं, आज पूरी दुनिया के भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। लेकिन बरसाना की इतनी महत्ता होते हुए भी वह गंदगी से भरा है, उपेक्षित है। बरसाने को ही नहीं बल्कि पूरे ब्रज को दोबारा रमणिक बनाने के लिए एक एनजीओ बृज फाउंडेशन कुछ वर्षों से काम कर रहा है।
बरसाना मथुरा से लगभग 40 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। यहां के हालात बदतर हैं। यहां आभास होता है कि अपने समय में यह जगह कितनी सुंदर, कितनी मनोरम होगी। ब्रह्मांचल पहाड़ी पर राधा रानी के 4 सुंदर मंदिर हैं। बरसाने में ही वृषभानु कुंड और कीर्ति कुंड नाम के 2 कुंड हैं। लोक मान्यता है कि राधा अपने माता-पिता के साथ स्नान के लिए यहां आया करती थीं। वृषभानु कुंड के किनारे 3 मंजिला विशाल सुंदर जलमहल है। चारों तरफ सुंदर मेहराबें और स्तम्भ हैं। लेकिन वक्त के थपेड़ों ने महल को खस्ताहाल बना दिया था। इसका अबजीर्णोद्धार हुआ है।
ब्रज फाउंडेशन के सीईओ विनीत नारायण ने बताया कि ''यहां की हालत देखकर हमें बहुत दुख हुआ, आखिर राधाकृष्ण का नाम सभी लेते हैं। पूरी दुनिया में उनके भक्त हैं। फिर भी उनका ब्रज गंदा क्यों है? बरसाने के विरक्त संत श्री रमेश बाबा की प्रेरणा से हमने संकल्प लिया कि ब्रज की ऐतिहासिक गरिमा को पुन: कायम किया जाए। इसलिए हमने ब्रज फाउंडेशन की स्थापना की।''

ब्रज फाउंडेशन ने कई कुंडों और वनों का कायाकल्प कर दिया है। वनों को भी व्यवस्थित किया जा रहा है। आईआईटी रुड़की के टीचर्स और छात्रों की गाइडेंस में 32 सूखे कुंडों की खुदाई की गई। उनमें जलस्रोत खोलने के लिए कुएं बनाए गए। उन कुंडों में से कुछ में पंप के सहारे यमुना का पानी डाला गया। इस तरह इन कुंडों का जीर्णोद्धार हुआ।
यमुना मैली हो गई है इसलिए कुंडों में डाले गए पानी को फ्युरीफाई किया गया। जिससे इन कुंडों का उपयोग करने वाले ब्रजवासियों और तीर्थयात्रियों को शुद्ध जल मिले। बरसाने के वृषभानु कुंड, रूप सरोवर और दोहनी कुंड को पुन: जीवंत करने के बाद इनके चारों तरफ घाट बनाए गए हैं।
दुर्भाग्यवश, इस भूमि के चारों तरफ के भूभाग पर हाल तक गंदगी और मलबा डाला जाता था। क्षेत्र की कई गंदी नालियों का पानी इस कुंड में बहाया जाता था। साथ ही स्थानीय भूमाफियाओं द्वारा इस कुंड की भूमि से जुड़े सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर इस भूभाग पर कब्जा करने की साजिश रची जा रही है।
स्थानीय प्रशासन, पर्यटन विभाग के साथ ही राज्य और केंद्र सरकार ने भी इसके रखरखाव की आजतक सुध नहीं ली है। 'इसलिए इस क्षेत्र के संरक्षण का भार हमने उठाया है और स्थानीय प्रशासन से सहयोग लेना शुरू किया है', नारायण ने कहा।
एसडीएम रितु शर्मा की अध्यक्षता में 9 स्थानीय सदस्यों वाली ''वृषभानु कुंड और जलमहल संरक्षण समिति'' का गठन किया गया है। ब्रज फाउंडेशन के एक प्रतिनिधि भी इसमें हैं। लगता है कि बरसाना की ऐतिहासिक धरोहर फिर से जीवंत होती जा रही है। आगामी 19 सितंबर बुधवार की राधाष्टमी की पूर्वसंध्या पर यहां सालाना बरसाना महोत्सव होगा। वृषभानु कुंड में ही राधाकृष्ण नौका विहार करेंगे। जलमहल को रोशनी से सजाया जाएगा। सामने खुले मंच पर देश के जाने-माने कलाकार श्रीराधा रानी के जन्मोत्सव पर अपनी कला की प्रस्तुति देंगे।
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